आचार संहिता क्‍या है, कब लागू की जाती है| Model Code of Conduct during Elections

चुनाव आयोग ने लोकसभा चुनाव के तारीखों की घोषणा कर दी है। इसके साथ ही देशभर में आदर्श आचार संहिता भी लागू हो गई है। चुनाव आयोग के द्वारा की गई घोषणा के अनुसार देशभर में कुल 7 चरणों में लोकसभा चुनाव कराए जाएगें। चुनाव के पहले चरण का मतदान 11 अप्रैल को होना है जबकि मतगणना 23 मई को होगी।

आचार संहिता क्‍या है?

आचार संहिता कुछ नियमों की एक सूची होती है। इस दौरान राजनेताओं को दिशा निर्देश जारी किए जाते हैं कि चुनाव प्रक्रिया के दौरान उन्‍हें क्‍या करना है और क्‍या नहीं करना है। इन निर्देशों का पालन चुनावी उम्‍मीदवारों को न सिर्फ अपने भाषणों में करना होता है बल्‍कि सभी प्रकार के चुनावी प्रचार और यहां तक कि उनके घोषणापत्रों में भी करना होता है।

आचार संहिता कब लागू की जाती है?

चुनाव आयोग जब चुनाव की तारीखों की घोषणा करती है, इसके बाद तत्‍काल प्रभाव से अगले आदेश तक आचार संहिता लागू हो जाती है। संविधान के अनुच्‍छेद 324 के तहत निष्‍पक्ष और निर्विवाद चुनाव संपन्‍न कराना इसका मुख्‍य उद्देश्‍य होता है, और इस दौरान सभी राजनेताओं और चुनावी उम्‍मीदवारों को इन सभी निर्देशों का पालन करना होता है। आचार संहिता लागू होने के बाद अगर कोई नेता या चुनावी उम्‍मीदवार मतदाताओं को रिश्‍वत देते हुए या किसी तरह की अनैतिक कार्य करते हुए पकड़े जाते हैं तो उनके खिलाफ चुनाव आयोग द्वारा कार्यवाही की जाती है।

  • राजनीतिक पार्टियों को अपने प्रतिद्वंदी पार्टियों की उनके पिछले रिकॉर्ड के आधार पर ही आलोचना करनी होगी।
  • वोटरों को लुभाने के लिए जाति और सांप्रदायिक लाभ उठाने से बचना होगा।
  • झूठी जानकारी के आधार पर उम्‍मीदवारों की आलोचना नहीं करनी होगी।
  • वोटरों को किसी तरह की रिश्‍वत नहीं देनी है।
  • प्रदर्शन और अनशन भी प्रतिबंधित होगा।

मीटिंग (Party Meeting)

पार्टियों को अगर कोई बैठक या सभा करनी होगी तो उन्‍हें उस इलाके के स्‍थानीय पुलिस को इसकी पूरी जानकारी देनी होगी ताकि वे सुरक्षा व्‍यवस्‍था का पुख्‍ता इंतजाम कर सकें।

चुनाव प्रचार (Election Campaign)           

अगर दो या दो से अधिक पार्टियां एक ही रुट में चुनाव प्रचार के लिए निकली हैं तो आयोजनकर्ताओं को आपस में संपर्क करके बातचीत करनी होगी, ताकि वे आपस में झगड़ा न हो। एक दूसरे के विरोध में हिंसा का प्रयोग बिल्‍कुल प्रतिबंधित होगा।

पोलिंग डे (Polling Day)

सभी पार्टी कार्यकर्ताओं को एक पहचान पत्र रखना होगा। इसमें किसी पार्टी का नाम नहीं होगा न ही चुनात चिन्‍ह और न ही किसी चुनावी उम्‍मीदवार का नाम होगा।

पोलिंग बूथ (Polling Booth)

जिन मतदाता के पास चुनाव आयोग के द्वारा मान्‍य पास होगा वे ही पोलिंग बूथ के अंदर जा सकते हैं।

निरीक्षण (Inspection)

चुनाव आयोग हर पोलिंग बूथ के बाहर एक निरीक्षक तैनात करेगा ताकि अगर आचार संहिता को कोई उल्‍लंघन कर रहा है तो उसकी शिकायत उनके पास की जा सके।

सत्‍ताधारी पार्टी (Ruling Party)

इस दौरान सत्‍ताधारी पार्टी के मंत्रियों को किसी भी तरह की आधिकारिक दौरे की मनाही होगी, ताकि ये सुनिश्‍चित किया जा सके कि वे अपनी आधिकारिक दौरे पर चुनावी प्रचार-प्रसार न करें। उन्‍हें किसी तरह के लोक लुभावने वादे नहीं करने होंगे। सार्वजनिक स्‍थानों पर किसी तरह का एकाधिकार नहीं होगा।

चुनावी घोषणापत्र (Election Manifesto)

2013 में जारी किए गए नए दिशा निर्देशों के अनुसार इस नियम में ये कहा गया है कि चुनावी घोषणापत्र में बताए गए वादों को पूरा करना होगा।

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