मिड डे मील योजना | Midday Meal Scheme

मिड डे मील योजना (MDM) केंद्र सरकार द्वारा चलाई जा रही है। इस योजना के माध्यम से स्कूलों में पढ़ रहे छोटे बच्चे को पोषक भोजन खाने के लिए दिया जाता है। यह योजना काफी सालों से हमारे देश में चल रही है और इस योजना को सभी राज्यों के स्कूलों में चलाया जा रहा है।  योजना के तहत हर दिन करोड़ों बच्चों को स्कूल में भोजन दिया जाता है।

योजना: मिड डे मील (Mid Day Meal)

शुरू हुई: 1995

सरकार: केंद्र सरकार (Central Govt.)

मंत्रालय: मानव संसाधन विकास मंत्रालय (HRD)

किसके लिए शुरू की गयी: स्कूल में पढ़ रहे छोटे बच्चों के लिए

मिड डे मील (MDM) योजना का उद्देश्य:

  • मिड डे मील बच्चों से जुड़ी योजना है जिसका मकसद सरकारी स्कूलों में पढ़ रहे बच्चों को अच्छा भोजन मुहैया करवाना है।
  • बच्चों का बेहतर विकास: आज भी हमारे देश में कई ऐसे लोग हैं जो कि अपने परिवार को दो वक्त का खाना देने में असमर्थ है जिसके कारण इन परिवारों के छोटे बच्चों का मानसिक विकास नहीं हो पाता इसलिए सरकार, सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले गरीब बच्चों को मिड डे मील योजना के जरिए पोषक भोजन उपलब्ध कराती है ताकि बच्चों का बेहतर मानसिक विकास हो।
  • ज्यादा से ज्यादा बच्चे स्कूल आएं: मिड डे मील का दूसरा बड़ा उद्देश्य शिक्षा से जुड़ा है जैसा की इस योजना के माध्यम से बच्चों को खाना उपलब्ध कराया जाता है जिससे कई गरीब परिवार ने अपने बच्चों को सरकारी स्कूलों में भेजना शुरू किया है।
  • सूखा प्रभावित क्षेत्रों बच्चों को खाना मुहैया कराना: गर्मियों की छुट्टियों में स्कूल बंद होने के कारण बच्चों को भोजन नहीं मिल पाता। लेकिन साल 2004 में सरकार में गर्मियों की छुट्टियों के दिन भी योजना के तहत सूखा प्रभावित क्षेत्रों के स्कूलों में चलाए रखना का आदेश दिया था। जिसके बाद से इन क्षेत्रों के बच्चों को गर्मियों की छुट्टियों में भी भोजन दिया गया था।
mid day meal

मिड डे मील स्कीम को लेकर किसी तरह का घोटाला और लापरवाही ना हो इसलिए मानव संसाधन विकास मंत्रालय (HRD) ने कई कमेटियों का गठन किया जिनमें से कुछ कमेटी नेशनल लेवल पर, कुछ स्टेट लेवल पर, जिला, नगर, ब्लॉक, गांव और स्कूल लेवल पर इस योजना के कार्य की निगरानी करतीं है और यह सुनिश्चित करती है कि देश के हर सरकारी स्कूलों में सही तरह का भोजन बच्चों को दिया जा रहा है।

कमेटियों के अलावा संयुक्त समीक्षा मिशन (JRM) भी इस योजना को और बेहतर बनाने के लिए कार्य करता है। केंद्र सरकार द्वारा गठित किए गए JRM के सदस्य शैक्षणिक और पोषण विशेषज्ञ होते हैं जो समय समय क्षेत्र स्कूलों में जाकर इस योजना की समीक्षा करते हैं।

मिड डे मील योजना (MDM) की कुछ जरूरी बातें:

  • जिन स्कूलों में मिड डे मील योजना के मुताबिक खाना बनाया जाता है उन स्कूलों को यह खाना रसोई घर में ही बनाना होता है, स्कूल किसी खुली जगह में या किसी अन्य स्थान पर इस खाने को नहीं बना सकता।
  • रसोई घर, क्लासरूम से अलग होना चाहिए ताकि बच्चों को पढ़ाई करते समय किसी भी तरह की परेशानी ना हो।
  • स्कूल में खाना बनाने में इस्तेमाल होने वाले ईंधन जैसे रसोई गैस को किसी सुरक्षित स्थान पर रखना है। इसी के साथ खाना बनाने वाली चीजों को भी साफ जगह पर रखना आवश्यक है।
  • खाना बनाने में इस्तेमाल होने वाली चीजों की क्वालिटी अच्छी होनी चाहिए और पेस्टिसाइड वाले अनाजों का प्रयोग किसी भी प्रकार के खाने में नहीं होना चाहिए।
  • खाना बनाने के लिए केवल एगमार्क गुणवत्ता और ब्रांडेड वस्तुओं का इस्तेमाल करना |
  • खाना बनाने से पहले सब्जी दाल और चावल को अच्छे से धोना।
  • खाना बनाने वाले रसोइयों और खाना परोसने वाले व्यक्तियों को अपनी साफ-सफाई का ध्यान रखना होगा।
  • खाना बनने के बाद, खाने को दो या तीन लोगों को चखना होगा और इन दो या तीन लोगों में कम से कम एक टीचर शामिल होना चाहिए।
  • समय-समय पर बच्चों को दिए जाने वाले इस खाने के नमूनों का टेस्ट स्कूलों को मान्यता प्राप्त प्रयोगशालाओं में कराना होगा।

मिड डे मील (MDM) में दिए जाने वाले खाने का विवरण:

गाइडलाइंस के मुताबिक कक्षा एक से पांच तक के हर बच्चे को दिए जाने वाले खाने में कैलोरी की मात्रा 450 और प्रोटीन की मात्रा 12 ग्राम  होनी चाहिए जबकि छठी से आठवीं कक्षा में पढ़ने वाले बच्चों को दिए जाने वाले खाने में कैलोरी की मात्रा 700 और प्रोटीन की मात्रा 20 ग्राम होनी चाहिए।

मिड डे मील योजना का मकसद बच्चों को पोषण भरा खाना देना ताकि बच्चों का बेहतर विकास हो। सरकार द्वारा बच्चों को किस तरह का खाना दिया जाना है उसके लिए भी गाइडलाइन्स है।

वीडियो देखें: यहाँ

मिड डे (MDM) मील स्कीम योजना के फायदे :

  • इस योजना के लागू होने से कई गरीब बच्चे पेट भर खाना खा सकते हैं।
  • आज भी हमारे देश के ग्रामीण इलाकों में लड़कियों की शिक्षा को लेकर काफी पिछड़ापन है, लेकिन इस योजना के तहत बच्चों को मुफ्त में खाना खिलाया जाता है जिसकी वजह से लोगों ने अपनी बेटिओं को स्कूल भेजना शुरू किया ताकि उनकी बेटियों को अच्छा और पौस्टिक खाना मिल सके।
  • बच्चों को पौष्टिक खाना मिलने से उनका बेहतर विकास होता है।
  • स्कूल में खाना मिलने के कारण बच्चों के परिवार वालों द्वारा इन्हें हर दिन स्कूल भी भेजा जाता है।
  • मिड डे मील योजना की वजह से हर दिन कई बच्चों को पेट भर खाना दिया जाता है और ऐसा होने से हमारे देश के गरीब बच्चों को कुपोषण जैसी खतरनाक बीमारी का शिकार होने से बचा सकते हैं।

राज्य सरकार अपने हिसाब से भी दे सकती है खाना

यह स्कीम केंद्र और राज्य सरकार दोनों द्वारा चलाया जाता है और इसलिए राज्य सरकार अपने हिसाब से बच्चों को दिए जाने वाले खाने का मैन्यू बना सकती है इस योजना के अनुसार अगर कोई राज्य अपने स्कूल के बच्चों को दूध या फिर फल भोजन में देना चाहती है तो ऐसा कर सकते हैं।

उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, गुजरात, कर्नाटक, केरला और पांडिचेरी राज्यों में बच्चों को दूध, फल आदि चीजें भी मिड डे मील में दी जाती है।

मिड डे मील: साइट

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